पानी की मांग को लेकर किसानों ने किया जल संसाधन विभाग का घेराव, हजारों एकड़ धान की फसल बर्बादी की कगार पर दो दिनों के भीतर नहरों में पानी छोड़ने की मांग, मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

 

लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद।
पानी की मांग को लेकर किसानों ने किया जल संसाधन विभाग का घेराव, हजारों एकड़ धान की फसल बर्बादी की कगार परदो दिनों के भीतर नहरों में पानी छोड़ने की मांग, मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनगरियाबंद जिले के फिंगेश्वर क्षेत्र में धान की फसल के लिए पानी की किल्लत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में नमी खत्म होने, जमीन में दरारें पड़ने और धान की फसल सूखने की स्थिति को देखते हुए पेंड्रा, पाली, भसेरा, फुलकरा और पसौद गांव के सैकड़ों किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जल संसाधन विभाग का घेराव कर दिया। किसानों ने विभाग के सामने नहरों में तत्काल पानी छोड़ने की मांग उठाई और चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

खेतों में पड़ रही दरारें, सूखने लगी धान की फसल

किसानों के अनुसार, फिंगेश्वर क्षेत्र के कई गांवों में धान की फसल पानी के अभाव में संकट का सामना कर रही है। जिन खेतों में धान की फसल लहलहानी चाहिए, वहां अब जमीन सूखने लगी है और खेतों में दरारें पड़ रही हैं। किसानों का कहना है कि समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिलने से फसल की बढ़वार प्रभावित हो रही है। यदि जल्द ही नहरों से पानी नहीं पहुंचा, तो हजारों एकड़ में लगी धान की फसल बर्बाद हो सकती है।

किसानों ने बताया कि धान की खेती पूरी तरह सिंचाई पर निर्भर है। खेती के इस महत्वपूर्ण समय में पानी नहीं मिलने से उनकी महीनों की मेहनत पर संकट मंडराने लगा है। फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसका असर उनके परिवारों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।

पांच गांवों के किसानों की एक ही मांग—नहरों में तत्काल छोड़ा जाए पानी

पेंड्रा, पाली, भसेरा, फुलकरा और पसौद गांव के किसानों ने एकजुट होकर जल संसाधन विभाग के समक्ष अपनी समस्या रखी। किसानों की प्रमुख मांग है कि बिना किसी और देरी के नहरों में पानी छोड़ा जाए, ताकि सूखती फसल को बचाया जा सके।

किसानों का कहना है कि जब धान की फसल को पानी की सबसे अधिक जरूरत है, तब नहरों में पानी नहीं मिलने से किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अब उनके पास फसल को बचाने के लिए समय बहुत कम बचा है। ऐसे में विभाग को केवल आश्वासन देने के बजाय जल्द से जल्द पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

दो दिनों का अल्टीमेटम, नहीं तो होगा उग्र आंदोलन

जल संसाधन विभाग का घेराव करने पहुंचे किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें दो दिनों के भीतर नहरों में पानी चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में पानी नहीं छोड़ा गया, तो वे अपने हक के लिए उग्र आंदोलन करेंगे।

किसानों का कहना है कि खेती में लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर पैसा खर्च करने के बाद यदि पानी के अभाव में फसल नष्ट हो जाती है, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में उनकी मांग है कि विभाग उनकी परेशानी को गंभीरता से लेते हुए तत्काल ठोस कदम उठाए।

विभाग ने दिया पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन

किसानों के घेराव के बाद जल संसाधन विभाग की ओर से उन्हें समय पर पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, किसानों की असली राहत तभी सुनिश्चित होगी, जब नहरों में पानी पहुंचेगा और सूखती फसल को सिंचाई मिल सकेगी।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि विभाग अपने आश्वासन को कितनी जल्दी पूरा करता है। किसानों के लिए आने वाले दो दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि इस अवधि में नहरों में पानी नहीं पहुंचा, तो फसल को बचाने की चुनौती और गंभीर हो सकती है।

किसानों के हित में त्वरित कार्रवाई जरूरी

फिंगेश्वर क्षेत्र के किसानों की यह समस्या केवल सिंचाई के पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी आजीविका और पूरे कृषि सीजन से जुड़ी हुई है। समय पर पानी मिलना धान की फसल को बचाने के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में जल संसाधन विभाग और संबंधित अधिकारियों को किसानों की मांग पर प्राथमिकता से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि उनकी मेहनत और खेती में लगाया गया पैसा बर्बाद होने से बच सके।

अब सवाल यह है कि क्या जल संसाधन विभाग दो दिनों के भीतर नहरों में पानी पहुंचाकर किसानों की सूखती फसल को बचा पाएगा, या फिर किसानों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?