पीएम आवास के लिए रेत जुटाना बना मुसीबत! एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठा हितग्राही, समर्थन में उतरे अन्य हितग्राही और पार्षद रेत से भरा ट्रैक्टर छोड़ने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन, आवास निर्माण के लिए रेत की उपलब्धता पर उठे सवाल

पीएम आवास के लिए रेत जुटाना बना मुसीबत! एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठा हितग्राही, समर्थन में उतरे अन्य हितग्राही और पार्षद

रेत से भरा ट्रैक्टर छोड़ने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन, आवास निर्माण के लिए रेत की उपलब्धता पर उठे सवाल

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लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद। गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित की जा रही है, लेकिन योजना के हितग्राहियों को मकान बनाने के लिए जरूरी निर्माण सामग्री जुटाने में ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गरियाबंद जिले के देवभोग नगर पंचायत में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां पीएम आवास हितग्राही सनत नागेश अपनी मांगों को लेकर देवभोग एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गया है। उसके समर्थन में अन्य आवास हितग्राही और पार्षद भी धरना स्थल पर मौजूद हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर आवास निर्माण के लिए रेत की उपलब्धता और खनिज विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मामला पीएम आवास हितग्राही सनत नागेश से जुड़ा है। सनत नागेश का कहना है कि उसने अपने आवास का निर्माण कराने के लिए रेत मंगवाई थी, लेकिन 6 अक्टूबर को क्षेत्र में आयोजित सेवा सेतु शिविर के दौरान जिला खनिज अधिकारी ने रेत से भरे ट्रैक्टर को पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि यह रेत पीएम आवास के निर्माण के लिए मंगाई जा रही थी। कार्रवाई के बाद रेत और उसके रिश्तेदार के वाहन को छोड़ने की मांग को लेकर हितग्राही ने एसडीएम कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया है।

सनत नागेश की मांग है कि आवास निर्माण के लिए मंगाई गई रेत और उसके रिश्तेदार के वाहन को छोड़ा जाए, ताकि उसका मकान बनाने का काम आगे बढ़ सके। हितग्राही का कहना है कि जब सरकार गरीबों को पक्का मकान देने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, तब निर्माण के लिए जरूरी रेत की व्यवस्था करना भी आसान होना चाहिए।

सरकारी योजना के सामने रेत की उपलब्धता का सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन मकान निर्माण के लिए रेत, गिट्टी, सीमेंट और अन्य सामग्री की जरूरत होती है। ऐसे में यदि हितग्राहियों को रेत आसानी से उपलब्ध नहीं होती, तो आवास निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पीएम आवास के हितग्राही आखिर अपने मकान के निर्माण के लिए रेत की व्यवस्था कैसे करें? यदि बाजार में रेत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जटिल है या उसकी कीमत हितग्राहियों की पहुंच से बाहर है, तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जो सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच अपना घर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

हितग्राही पक्ष का कहना है कि कम खर्च में रेत की व्यवस्था करने के प्रयास के दौरान उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, खनिज विभाग की ओर से ट्रैक्टर को पकड़ने की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वाहन और रेत पर कार्रवाई किस आधार पर की गई।

खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

धरना स्थल पर मौजूद लोगो ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अवैध रेत परिवहन करने वालों के साथ विभागीय अधिकारियों के संपर्क को लेकर भी जांच होनी चाहिए। आरोप है कि जो हितग्राही अपने स्तर पर कम खर्च में रेत की व्यवस्था करने का प्रयास करता है, उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। हालांकि, लोगो द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

धरने को मिला समर्थन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

सनत नागेश के धरने पर बैठने के बाद अन्य पीएम आवास हितग्राही और पार्षद भी उसके समर्थन में धरना स्थल पर पहुंच गए हैं। इससे मामला केवल एक हितग्राही की मांग तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि आवास निर्माण के लिए रेत की उपलब्धता और हितग्राहियों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है।

धरना दे रहे हितग्राही पक्ष का कहना है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती और रेत व वाहन को छोड़ने के संबंध में समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

देवभोग में सामने आए इस मामले में प्रशासन के सामने एक ओर खनिज नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर सरकारी आवास योजना के हितग्राहियों की समस्याओं का समाधान करना भी जरूरी है। यदि रेत के परिवहन में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि पात्र आवास हितग्राहियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन धरने पर बैठे सनत नागेश की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और पीएम आवास के हितग्राहियों को रेत की उपलब्धता से जुड़ी परेशानियों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।