बदलते मौसम, घटते जलस्तर और खेती की बढ़ती लागत के बीच छत्तीसगढ़ के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण (Marigold Farming) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। राजनांदगांव जिले के ग्राम जंगलेश्वर के किसान वीरेंद्र कुमार साहू ने इस खरीफ सीजन में धान की जगह गेंदा फूल की खेती शुरू कर नई मिसाल पेश की है। उनका मानना है कि कम पानी में तैयार होने वाली यह फसल न केवल बेहतर उत्पादन देगी, बल्कि बाजार में अच्छी कीमत मिलने से आय भी बढ़ेगी। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजना ने उनके इस निर्णय को मजबूती दी है।
करीब 20 एकड़ कृषि भूमि के मालिक वीरेंद्र साहू बताते हैं कि पिछले साल अल्प वर्षा और बेमौसम बारिश के कारण धान की फसल को भारी नुकसान हुआ था। उत्पादन घटने से आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने खेती के तरीके में बदलाव करने का निर्णय लिया और ऐसी फसल चुनी, जिसमें पानी की कम आवश्यकता हो, लागत कम आए और बाजार में पूरे साल मांग बनी रहे।
धान की जगह गेंदा चुनने के पीछे बड़ी वजह
वीरेंद्र साहू का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण खेती (Marigold Farming) पहले जैसी नहीं रही। कभी सूखा तो कभी बेमौसम बारिश किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है। ऐसे में केवल धान पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गेंदा फूल की खेती अपेक्षाकृत कम पानी में आसानी से की जा सकती है। इसकी खेती में लागत भी नियंत्रित रहती है और उत्पादन मिलने के बाद बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना अधिक रहती है। यही कारण है कि उन्होंने अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में इस बार गेंदा की खेती करने का फैसला लिया।
कृषि विभाग के मार्गदर्शन से मिली नई दिशा
नई फसल (Marigold Farming) अपनाने से पहले वीरेंद्र साहू ने कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह ली। विभाग के मार्गदर्शन में सबसे पहले उनकी जमीन का मृदा परीक्षण कराया गया, ताकि खेत की गुणवत्ता के अनुसार खेती की वैज्ञानिक योजना बनाई जा सके।
कृषि अधिकारियों ने उन्हें गेंदा फूल (Marigold Farming) की उन्नत खेती, पौध तैयार करने, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और रोग नियंत्रण संबंधी तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध कराई। इससे उन्हें विश्वास मिला कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
Marigold Farming बाजार में पूरे साल बनी रहती है मांग
गेंदा फूल (Marigold Farming) की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतर बाजार मांग है। धार्मिक आयोजनों, मंदिरों, विवाह समारोहों, सामाजिक कार्यक्रमों और त्योहारों में पूरे वर्ष इसकी आवश्यकता बनी रहती है। राजनांदगांव के साथ-साथ निकटवर्ती दुर्ग और अन्य शहरों में भी गेंदा फूल का बड़ा बाजार उपलब्ध है। वीरेंद्र साहू का कहना है कि बाजार की उपलब्धता और बेहतर कीमत के कारण इस खेती से अच्छी आय मिलने की उम्मीद है। यदि प्रयोग सफल रहा तो आने वाले वर्षों में गेंदा की खेती का रकबा और बढ़ाया जाएगा।
फसल विविधीकरण से बढ़ेगी किसानों की आय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में फसल (Marigold Farming) विविधीकरण ही किसानों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प बनता जा रहा है। धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों के साथ कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने से जोखिम कम होता है और आय के नए स्रोत विकसित होते हैं।
वीरेंद्र साहू भी मानते हैं कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाएं तो जल संरक्षण के साथ खेती की लागत भी घटेगी और आय में वृद्धि होगी। इससे कृषि अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सकेगी।
सरकारी प्रोत्साहन से बढ़ा किसानों का भरोसा
राज्य सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 15 हजार रुपये की आदान सहायता उपलब्ध करा रही है। वीरेंद्र साहू का कहना है कि इस प्रोत्साहन राशि ने उन्हें नई फसल अपनाने का आत्मविश्वास दिया।
उनका मानना है कि यदि सरकार की योजनाओं और कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ किसानों तक लगातार पहुंचता रहा तो प्रदेश में अधिक से अधिक किसान धान के साथ वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाएंगे। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और जल संकट जैसी चुनौतियों से भी काफी हद तक निपटा जा सकेगा।
वीरेंद्र साहू का यह प्रयोग केवल एक किसान (Marigold Farming) की पहल नहीं, बल्कि बदलते समय के अनुरूप खेती में बदलाव की जरूरत का संदेश भी है। कम पानी, बेहतर बाजार और सरकारी सहयोग के साथ फसल विविधीकरण छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए भविष्य की नई राह बनता नजर आ रहा है।

