2016 से विराट ने एक तो रोहित ने सिर्फ 10 ओवर किए, जानें धोनी की कप्तानी जाने से क्यों घटे ऑलराउंडर

स्पोर्ट्स डेस्क. एशिया कप में भारत का दूसरा मुकाबला हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ था और इस मैच में विराट कोहली गेंदबाजी करते नजर आए। इस मैच में ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को आराम दिया गया था। ऐसे में कोहली छठे गेंदबाज की भूमिका में नजर आए और एक ओवर किया। 2016 के बाद यह पहला मौका था, जब विराट कोहली गेंदबाजी करते नजर आए। मौजूदा समय में भारतीय टीम के बल्लेबाज बहुत ही कम मौकों पर गेंदबाजी करते हैं और इसका असर भी कई मौकों पर देखने को मिलता है। टीम को कम ऑलराउंडर मिलने की वजह भी यही है। पहले के समय में सहवाग और सचिन जैसे गेंदबाज भी काफी गेंदबाजी करते थे और अहम मौकों पर विकट भी दिलाते थे। अब यह सूरत बदल चुकी है। दुनिया के सबसे महान बल्लेबाजों में शुमार सचिन ने अपने करियर में काफी गेंदबाजी की। वनडे में उनके नाम 154 विकेट, टेस्ट में 46 और टी20 में एक विकेट है। उनके साथी खिलाड़ी वीरेन्द्र सहवाग के नाम वनडे में 96 और टेस्ट में 40 विकेट हैं। ये दोनों ही खिलाड़ी अपनी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे, लेकिन समय-समय पर गेंदबाजी भी करते थे और कई बार गेंद से भी मैच जिता देते थे। अब के बल्लेबाजों में यह बात नहीं है।

भारत के मैच जीतने के बाद सचिन तेंदुलकर के साथ जश्न मनाते भारतीय खिलाड़ी
कप्तान बदलने से बदले हालात : विराट कोहली 2017 में तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम के कप्तान बने थे। इससे पहले महेंद्र सिंह धोनी और उनसे पहले सौरव गांगुली ने लंबे समय तक भारत की कप्तानी की। ये दोनों ही खिलाड़ी अपने बल्लेबाजों से भी कुछ ओवर गेंदबाजी जरूर कराते थे। इसी वजह से सहवाग और सचिन जैसे खिलाड़ियों को गेंदबाजी की आदत बनी रही। धोनी ने सुरैश रैना और केदार जाधव जैसे खिलाड़ियों को भी गेंदबाज के रूप में काफी इस्तेमाल किया। जाधव तो भारत के लिए गेंदबाजी करने से पहले विकेटकीपर हुआ करते थे। रैना ने भारत के लिए 62 विकेट लिए। वहीं, जाधव ने 27 विकेट झटके। धोनी और गांगुली की कप्तानी में यह बात थी कि दोनों अपने बल्लेबाजों से गेंदबाजी कराते थे और मौका मिलने पर खुद भी गेंदबाजी करते थे। गांगुली तो ऑलराउंडर थे, लेकिन विकेटकीपर धोनी भी नेट्स में काफी गेंदबाजी करते थे। मौका मिलने पर उन्होंने भारत के लिए भी गेंदबाजी की। इसी वजह से इन दोनों के कप्तान रहते कई ऐसे बल्लेबाज तैयार हुए, जो गेंद के साथ भी योगदान देने में सक्षम थे।
केदार जाधव
कोहली के कप्तान बनने के बाद बदली तस्वीर : विराट कोहली ने 2017 में तीनों फॉर्मेट में भारत की कप्तानी संभाली और तेज गेंदबाजी पर ज्यादा ध्यान दिया। इसी का फायदा भारत को मिला और विदेशों में जाकर टीम इंडिया ने टेस्ट सीरीज जीती। हालांकि, कोहली ने अपने बल्लेबाजों से गेंदबाजी कराना पूरी तरह बंद कर दिया। रोहित उनकी टीम के नियमित सदस्य रहे, लेकिन 2016 से लेकर अब तक उन्होंने सिर्फ 61 गेंदें की। रोहित ने अपने करियर की शुरुआत ऑफ स्पिन गेंदबाज के रूप में की थी और आईपीएल में हैट्रिक भी उनके नाम थी, लेकिन कोहली ने गेंदबाज रोहित का इस्तेमाल कभी नहीं किया। विराट खुद गेंदबाजी करते थे और 2016 में उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी ओवर भी किया था, लेकिन अपनी कप्तानी में उन्होंने कभी गेंदबाजी ही नहीं की। हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ उन्होंने छह साल बाद देश के लिए गेंदबाजी की। इस दौरान केएल राहुल, श्रेसय अय्यर, मयंक अग्रवाल जैसे कई खिलाड़ी टीम में आए, लेकिन किसी से गेंदबाजी कराने की कोशिश नहीं हुई।
विराट गेंदबाजी
ऑलराउंडर की कमी खली पर बल्लेबाजों को नहीं तैयार किया
इस दौरान विराट को कई बार ऑलराउंडर की कमी खली, लेकिन उन्होंने किसी बल्लेबाज को ऑलराउंडर बनाने की कोशिश नहीं की। खासकर 2021 विश्व कप में हार्दिक के चोटिल होने पर ऑलराउंडर की जरूरत थी। ऐसे में कोहली ने खुद नेट्स में गेंदबाजी का अभ्यास भी किया, लेकिन मैच में गेंदबाजी नहीं की। इसी वजह से भारत को हमेशा ही ऑलराउंडर की कमी खलती रही है। कपिल देव के जाने के बाद हार्दिक ही ऐसे खिलाड़ी मिले हैं, जो तेज गेंदबाजी करने के साथ बल्लेबाजी भी कर सकते हैं, लेकिन इस बीच में ऑलराउंडर की कमी नहीं खली, क्योंकि गांगुली और धोनी जैसे कप्तानों को अपने बल्लेबाजों से गेंदबाजी करानी आती थी। कोहली में इस बात की कमी रही। रोहित ने कप्तानी की जिम्मेदारी मिलने के बाद श्रेयस अय्यर से भी कुछ ओवर कराए। अब उन्होंने विराट से भी गेंदबाजी कराई। उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले मैचों में वो और भी बल्लेबाजों से गेंदबाजी कराएंगे। इससे उनके पास गेंदबाजी के विकल्प ज्यादा रहेंगे और कप्तान के रूप में वो कभी फंसेंगे नहीं। खासकर किसी गेंदबाज के चोटिल होने पर उनके पास गेंदबाजी के बाकी विकल्प मौजूद रहेंगे।