लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद/मैनपुर…… छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाईगर रिजर्व क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली और साथ ही मानवता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। नियमों की जकड़न और सिस्टम की लाचारी के बीच एक गर्भवती महिला को खुले आसमान के नीचे, सड़क पर ही प्रसव पीड़ा झेलनी पड़ी। टाईगर रिजर्व के तोरेंगा बैरियर में यात्री बस को रोक दिए जाने के कारण महिला ने अंधेरे में, मोबाइल की रोशनी में बच्चे को जन्म दिया।
क्या है पूरा मामला?….
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना उदंती टाईगर रिजर्व के तोरेंगा बैरियर की है। बताया जा रहा है कि एक यात्री बस मैनपुर की ओर आ रही थी। बस में अन्य यात्रियों के साथ एक गर्भवती महिला भी सवार थी।
जैसे ही बस तोरेंगा बैरियर पर पहुंची, वन विभाग के कर्मचारियों ने बस को रोक दिया। टाईगर रिजर्व क्षेत्र में वन्य जीवों की सुरक्षा को देखते हुए शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक आवागमन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है। नियम के अनुसार इसी के चलते बस को बैरियर पर ही रोक दिया गया और आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई।
इसी दौरान बस में सवार गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला दर्द से तड़पने लगी। बस में सवार अन्य महिला यात्रियों और परिजनों ने बैरियर पर तैनात कर्मचारियों से मानवता के नाते बस को मैनपुर अस्पताल तक जाने देने की गुहार लगाई, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए बस को नहीं छोड़ा गया।
मोबाइल की रोशनी में कराया गया प्रसव…..
रात का अंधेरा, जंगल का सन्नाटा और ऊपर से बैरियर का बंद होना ऐसी विपरीत परिस्थितियों में बस में मौजूद महिलाओं ने ही हिम्मत दिखाई। बस को सड़क किनारे खड़ा कर, खुले आसमान के नीचे ही प्रसव कराने का निर्णय लिया गया।
बैरियर पर न तो लाइट की व्यवस्था थी और न ही कोई स्वास्थ्य सुविधा। ऐसे में यात्रियों ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च और फ्लैश लाइट जलाकर रोशनी की व्यवस्था की। उसी धुंधली रोशनी में महिलाओं ने सुरक्षित प्रसव कराया। महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। कुछ देर के लिए तो वहां मौजूद हर शख्स की सांसें थम गई थीं, लेकिन बच्चे की किलकारी सुनते ही सभी के चेहरे पर राहत लौट आई।
प्रसव के बाद पहुंची एंबुलेंस…..
घटना की सूचना जैसे-तैसे मैनपुर स्वास्थ्य विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही 108 संजीवनी एंबुलेंस को मौके पर भेजा गया। काफी मशक्कत के बाद एंबुलेंस तोरेंगा बैरियर पहुंची और जच्चा-बच्चा दोनों को तत्काल मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार फिलहाल मां और नवजात दोनों की हालत स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है। डॉक्टरों की निगरानी में दोनों का उपचार जारी है।
नियम जरूरी, पर इंसानियत उससे बड़ी…..
उदंती टाईगर रिजर्व में रात में आवागमन बंद करना वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आपातकालीन और मानवीय परिस्थितियों में भी नियमों में थोड़ी नरमी नहीं बरती जा सकती?
एक गर्भवती महिला के लिए समय पर अस्पताल पहुंचना जीवन-मरण का सवाल होता है। ऐसे में अगर बस को मानवीय आधार पर जाने दिया जाता तो महिला को सड़क पर इस पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता।
फिलहाल इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में वन विभाग के इस रवैये को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि टाईगर रिजर्व क्षेत्र में एंबुलेंस, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन आवागमन की विशेष छूट दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।