आफत बनकर बरसे बादल: अर्नब चक्रवात से किसानों की कमर टूटी दो दिन में 448 मिमी बारिश ने तोड़ा 61 मिमी का औसत रिकॉर्ड, खेत बने तालाब, जमीन पर बिछ गई सोने जैसी धान

लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद…… अर्नब चक्रवात के असर से गरियाबंद जिले में मौसम ने ऐसी करवट ली है कि अन्नदाताओं की चिंता बढ़ गई है। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बेमौसम झमाझम बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पककर तैयार खड़ी सोने जैसी धान की फसल अब जमीन पर बिछ गई है।

जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक सुनहरी बालियां लहरा रही थीं, वहां अब सिर्फ पानी और गिरी हुई फसल का मंजर है। किसान खेत के मेड़ पर खड़ा होकर अपनी बर्बाद होती फसल को बेबस निगाहों से देख रहा है।

दो दिन में औसत से सात गुना ज्यादा बारिश…..
मौसम विभाग के आंकड़े इस आफत की गंभीरता को बयां कर रहे हैं। सामान्य तौर पर इस समय जिले में औसत बारिश 61 मिलीमीटर मानी जाती है, लेकिन बीते दो दिनों में ही जिले भर में कुल 448 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यानी औसत से लगभग सात गुना ज्यादा।

लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में पानी भर गया है। पकने की कगार पर खड़ी धान की फसल हवा के थपेड़ों से जमीन पर गिर गई है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘फसल का लोट जाना’ कहते हैं।
किसानों की दोहरी मार – काली पड़ेगी बाली, बोदरा होगा धान

इस बेमौसम बारिश से किसानों को दोहरा नुकसान…..*पकी फसल पर संकट* जिन खेतों में धान की बालियां पूरी तरह पक चुकी थीं, उनमें लगातार पानी में डूबे रहने से दाने काले पड़ने लगे हैं। काली पड़ी धान की बाजार में कीमत नहीं मिलेगी और वो खाने लायक भी नहीं रहेगी।
*अधपकी फसल पर संकट* किसानों का कहना है कि जिन बालियों में अभी दाना पूरी तरह नहीं भरा है, वहां अब दाना नहीं बन पाएगा। किसान इसे ‘बोदरा धान’ होना कहते हैं – यानी ऊपर से बाली तो दिखेगी लेकिन अंदर चावल नहीं बनेगा। इससे उत्पादन आधा रह जाने की आशंका है।

“पूरे साल कर्ज लेकर खेती की, खाद-बीज डाला। अब जब फसल घर आने वाली थी, तब बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। अगर दो-तीन दिन और पानी नहीं सूखा तो खेत में ही धान सड़ जाएगा।” – एक पीड़ित किसान

2 नवंबर तक और बारिश के आसार, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी….. किसानों की चिंता तब और बढ़ गई है जब मौसम विभाग ने 2 नवंबर तक इसी तरह बारिश जारी रहने की संभावना जताई है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने सर्वे शुरू कर दिया है। गरियाबंद के कृषि उपसंचालक चंदन कुमार रॉय ने बताया कि…. बारिश से फसल को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए मैदानी अमले को निर्देश दिए गए हैं। सभी राजस्व और कृषि अमले गांव-गांव जाकर नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।”

उन्होंने किसानों से दो अहम अपील की है….. जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया है, वे 72 घंटों के भीतर फसल बीमा कंपनी क़ो 14447 पर कॉल करके तुरंत सूचना दें
और अपने पटवारी को नुकसान की जानकारी जरूर दें, ताकि मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हो सके। फोटो और वीडियो भी सबूत के तौर पर रखें।
और जिन किसानों ने अभी तक धान की कटाई नहीं की है, वे 2 नवंबर तक कटाई बिल्कुल न करें। गीली फसल काटने से नुकसान और बढ़ेगा। मौसम साफ होने का इंतजार करें।

फिलहाल गरियाबंद के किसान टकटकी लगाए आसमान की ओर देख रहे हैं। हर किसी के मन में एक ही सवाल है – क्या मौसम जल्द साफ होगा? अगर नहीं, तो इस साल की दिवाली किसानों के लिए काली दिवाली साबित हो सकती है।आफत बनकर बरसे बादल: अर्नब चक्रवात से किसानों की कमर टूटी
दो दिन में 448 मिमी बारिश ने तोड़ा 61 मिमी का औसत रिकॉर्ड, 
खेत बने तालाब, जमीन पर बिछ गई सोने जैसी धान