Academic Session : छत्तीसगढ़ में बदला स्कूलों का कैलेंडर, अब 1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र

शैक्षणिक सत्र (Academic Session) को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के स्कूलों में शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से नया शिक्षा सत्र अब 1 अप्रैल से 31 मार्च तक संचालित होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों की तर्ज पर किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही सभी शैक्षणिक सुविधाएं समय पर मिल सकें।

16 जून की जगह अब 1 अप्रैल से होगी पढ़ाई

स्कूल शिक्षा विभाग (Academic Session) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अभी तक राज्य में 16 जून से 30 अप्रैल तक चलने वाली सत्र व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। इसकी जगह अब प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक नया शैक्षणिक सत्र चलेगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को पत्र भेजकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह नई व्यवस्था 2027-28 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगी।

गर्मी की छुट्टियों में नहीं होगा कोई बदलाव

सरकार ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र बदलने के बावजूद ग्रीष्मकालीन अवकाश में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। विद्यार्थियों को पहले की तरह ही 1 मई से 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां मिलती रहेंगी यानी पढ़ाई का कैलेंडर (Academic Session) बदलेगा, लेकिन अवकाश की अवधि पहले जैसी ही रहेगी।

सत्र के पहले दिन ही मिलेंगी किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल

नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अब हर वर्ष 1 अप्रैल को सत्र शुरू होने के साथ ही शाला प्रवेश उत्सव, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण, सरस्वती सायकल योजना के तहत साइकिल वितरण, स्कूली गणवेश (यूनिफॉर्म) और अन्य छात्रहितैषी योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि सत्र शुरू होने के साथ ही बच्चों के पास पढ़ाई के लिए सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हों और शुरुआती महीनों में किसी प्रकार की देरी न हो।

Academic Session शिक्षण व्यवस्था होगी अधिक व्यवस्थित 

स्कूल शिक्षा विभाग (Academic Session) का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से विद्यार्थियों का शैक्षणिक समय बेहतर तरीके से उपयोग हो सकेगा। किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सुविधाएं समय पर मिलने से पढ़ाई की निरंतरता बनी रहेगी और विद्यालयों में शिक्षण कार्य अधिक व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से संचालित होगा। सरकार के अनुसार यह बदलाव राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख शिक्षा बोर्डों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को भी सत्र संचालन में बेहतर समन्वय और सुविधा मिलेगी।