लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद….. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद वन परिक्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव-विविधता से देश-दुनिया को चौंका दिया है। यहां मकड़ियों की जैव-विविधता पर चल रहे एक शोध के दौरान वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता हाथ लगी है।
शोधकर्ताओं की टीम ने ‘मांगोरा बाई’ (Mangora baii Mi & Li, 2021) नामक ऑर्ब-वीवर मकड़ी को खोज निकाला है। खास बात यह है कि इस प्रजाति को भारत में पहली बार दर्ज किया गया है। इससे पहले यह दुर्लभ प्रजाति केवल चीन में साल 2021 में ही दर्ज की गई थी।
इस महत्वपूर्ण खोज की आधिकारिक पुष्टि 24 अक्टूबर को इंडियन जर्नल ऑफ नेचुरल साइंस ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी है, जिसके बाद यह खोज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हो गई है।
इस गौरवशाली खोज में शामिल शोधकर्ता दल मे डॉ 
अविनाश आर. निषाद, एमवीबी, पीजी कॉलेज, भखारा (धमतरी); डॉ. के.के. हीरास और यशवंत नायक, शासकीय दूर्गा महाविद्यालय, गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, रायपुर तथा संतगुरु घासीदास विश्वविद्यालय, रायपुर के शोधार्थी हितेश कुमार बारते शामिल है। शोधकर्ताओं ने इसे छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का पल बताया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, ऑर्ब-वीवर मकड़ियां अपने गोलाकार, सुंदर जालों के लिए जानी जाती हैं और ये पारिस्थितिकी तंत्र में कीट नियंत्रण में अहम भूमिका निभाती हैं। गरियाबंद के घने जंगलों में इसका मिलना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन क्षेत्र अभी भी कई अनछुए रहस्यों को अपने में समेटे हुए है।
इस खोज से गरियाबंद वन परिक्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर जैव-विविधता हॉटस्पॉट के रूप में एक नई पहचान मिलेगी और भविष्य में यहां और भी शोध की संभावनाएं बढ़ गई हैं।