लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद।
गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) क्षेत्र के दुर्गम पहाड़ी जंगलों में इन दिनों 32 हाथियों का एक बड़ा दल विचरण कर रहा है। हाथियों का यह दल आमामोरा वन क्षेत्र में मौजूद है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के बीच हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम थर्मल ड्रोन कैमरे की मदद से हाथियों की निगरानी कर रही है। वहीं, मैदानी स्तर पर हाथी मित्र भी लगातार सक्रिय रहकर दल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
इस संबंध में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने जानकारी साझा की है। वन विभाग का प्रयास है कि हाथियों की लोकेशन और उनके विचरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर…..
आमामोरा वन क्षेत्र अपनी दुर्गम पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में हाथियों के बड़े दल की निगरानी करना वन अमले के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। जंगल के भीतर हाथियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए थर्मल ड्रोन कैमरे का उपयोग किया जा रहा है।
थर्मल कैमरे की विशेषता यह है कि यह जीवों के शरीर से निकलने वाली ऊष्मा के आधार पर उनकी मौजूदगी का पता लगाने में मदद करता है। घने जंगलों और कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में यह तकनीक वन विभाग के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। ड्रोन के माध्यम से हाथियों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाने में सहायता मिलती है।
हाथी मित्र भी लगातार कर रहे निगरानी…..
हाथियों की निगरानी में केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि मैदानी अमले की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। हाथी मित्र लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। जंगल और आसपास के क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुसार हाथियों की लोकेशन की जानकारी जुटाना, संभावित खतरे के प्रति सतर्क रहना और ग्रामीणों तक जरूरी सूचना पहुंचाना इस निगरानी व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
हाथियों के बड़े दल की मौजूदगी को देखते हुए स्थानीय स्तर पर सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। हाथियों का विचरण प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन जब उनका आवागमन जंगल से लगे गांवों या ग्रामीणों के आने-जाने वाले रास्तों के करीब होता है, तब अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत पड़ती है।
आधुनिक तकनीक और मैदानी निगरानी का समन्वय……
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में थर्मल ड्रोन कैमरे के उपयोग से वन्यजीवों की निगरानी को तकनीकी सहयोग मिल रहा है। वहीं, हाथी मित्रों की मैदानी सक्रियता से स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी जुटाने में मदद मिलती है। दोनों माध्यमों के समन्वय से हाथियों के विचरण पर नजर रखने और मानव-हाथी संघर्ष की आशंका को कम करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
वन क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी के दौरान समय पर सूचना मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे ग्रामीणों को सावधान करने, हाथियों के करीब जाने से रोकने और अनावश्यक टकराव की आशंका कम करने में सहायता मिल सकती है।
ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील……
उदंति सीता नदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के आमामोरा वन क्षेत्र में 32 हाथियों के दल की मौजूदगी को देखते हुए जंगल और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हाथियों को देखने के लिए उनके नजदीक जाने, उन्हें घेरने, छेड़ने या फोटो-वीडियो बनाने के लिए जोखिम उठाने से बचना चाहिए। हाथियों के रास्ते में बाधा डालना भी खतरनाक हो सकता है।
यदि किसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिले, तो ग्रामीणों को वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए और तत्काल स्थानीय वन अमले को जानकारी देनी चाहिए।
फिलहाल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के दुर्गम पहाड़ी आमामोरा वन क्षेत्र में 32 हाथियों के दल की गतिविधियों पर वन विभाग की टीम थर्मल ड्रोन कैमरे और हाथी मित्रों की मदद से लगातार नजर रख रही है। वन विभाग की निगरानी का मुख्य उद्देश्य हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने के साथ वन्यजीवों और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करना है।