लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद…….
जिले के फिंगेश्वर नगर पंचायत क्षेत्र में रेत उत्खनन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। विरोध के बावजूद कथित तौर पर धड़ल्ले से अवैध रेत उत्खनन जारी है। आरोप है कि रेत निकालने के लिए नदी तट पर बनाई गई पिचिंग को भी तोड़ा गया है। इससे नदी तट की सुरक्षा, पर्यावरण और शासन को मिलने वाले राजस्व को लेकर चिंता बढ़ गई है। मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि गणेशपुर में रेत खदान स्वीकृत होने के बावजूद ठेकेदार द्वारा निर्धारित स्वीकृत क्षेत्र से बाहर दूसरे स्थान पर रेत निकालने का आरोप लगाया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर विरोध और आपत्तियों के बाद भी यदि नदी क्षेत्र में इस तरह उत्खनन जारी है, तो यह खनिज नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, उत्खनन की वैधानिक स्थिति और संबंधित ठेकेदार की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण खनिज विभाग की जांच और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर होना चाहिए।
स्वीकृत खदान की आड़ में दूसरे स्थान पर उत्खनन का आरोप…..
गणेशपुर में रेत उत्खनन के लिए खदान स्वीकृत है। लेकिन आरोप है कि निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहने के बजाय अन्य स्थान पर भी रेत निकाली जा रही है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह स्वीकृत खदान की सीमाओं, पर्यावरणीय शर्तों और खनन अनुमति के उल्लंघन का मामला बन सकता है।
नियमानुसार रेत खदान संचालक को केवल निर्धारित और स्वीकृत क्षेत्र में ही अनुमति की शर्तों के अनुरूप उत्खनन करना होता है। खदान की स्वीकृति का अर्थ यह नहीं है कि ठेकेदार नदी के किसी भी हिस्से से रेत निकाल सकता है। स्वीकृत क्षेत्र से बाहर उत्खनन पाए जाने पर संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी होती है।
नदी की पिचिंग तोड़ने से सुरक्षा पर खतरा
इस मामले में नदी की पिचिंग तोड़े जाने का आरोप भी गंभीर है। पिचिंग का उद्देश्य नदी तट को कटाव से बचाना और किनारों को स्थिर बनाए रखने में मदद करना होता है। यदि रेत निकालने के लिए नदी तट की संरचना को नुकसान पहुंचाया गया है, तो इससे मिट्टी का कटाव बढ़ने, किनारों के कमजोर होने और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।
ऐसे मामलों में केवल रेत की मात्रा का आकलन करना पर्याप्त नहीं है। संबंधित स्थल का निरीक्षण कर यह भी देखना जरूरी है कि नदी तट, पिचिंग और आसपास की संरचनाओं को कितना नुकसान पहुंचा है। यदि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो लागू नियमों के अनुसार उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
अवैध उत्खनन से शासन को राजस्व का नुकसान…….
रेत खनन की अनुमति, रॉयल्टी और अन्य लागू शुल्क शासन के राजस्व से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू हैं। स्वीकृत क्षेत्र के बाहर बिना वैध अनुमति के रेत निकाले जाने की पुष्टि होने पर खनिज नियमों के तहत कार्रवाई के साथ अवैध रूप से निकाली गई रेत की मात्रा और देय राजस्व का आकलन किया जा सकता है।
ऐसे मामलों में उत्खनन की मात्रा, परिवहन में इस्तेमाल वाहनों, रॉयल्टी भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर परिस्थितियों के अनुसार अवैध खनिज की जब्ती, वाहन पर कार्रवाई, नियमानुसार अर्थदंड और अन्य वैधानिक कदम उठाए जा सकते हैं। कार्रवाई का स्वरूप जांच में सामने आए तथ्यों और लागू प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
रेत खनन के नियम क्या कहते हैं?
रेत उत्खनन के मामलों में खनिज कानूनों के साथ पर्यावरण संरक्षण और नदी क्षेत्र से संबंधित लागू शर्तों का पालन आवश्यक होता है। प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं की जांच जरूरी है
स्वीकृत क्षेत्र की सीमा…. खदान संचालक को अनुमति में निर्धारित क्षेत्र के भीतर ही उत्खनन करना होता है। सीमा से बाहर खनन की पुष्टि होने पर वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
पर्यावरणीय शर्तों का पालन….. लागू पर्यावरणीय स्वीकृति, खनन योजना और अन्य अनुमतियों में निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी है। जहां आवश्यक हो, संबंधित स्वीकृतियों के बिना उत्खनन नहीं किया जा सकता।
नदी तट और संरचनाओं की सुरक्षा…. नदी की पिचिंग, तटबंध या अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाकर खनन करना संबंधित अनुमति और लागू नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। इसकी जांच तकनीकी निरीक्षण के आधार पर की जानी चाहिए।
रॉयल्टी और परिवहन दस्तावेज…. खनिज के वैध उत्खनन, भुगतान और परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। बिना वैध दस्तावेज खनिज परिवहन पाए जाने पर लागू नियमों के तहत कार्रवाई संभव है।
निरीक्षण और कार्रवाई….. खनिज विभाग को स्थल का निरीक्षण कर स्वीकृत खदान की सीमा, उत्खनन की मात्रा, अनुमति की शर्तों और रॉयल्टी संबंधी अभिलेखों का मिलान करना चाहिए। उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इन प्रावधानों का सटीक अनुप्रयोग खदान की स्वीकृति, पर्यावरणीय अनुमति, संबंधित क्षेत्र की स्थिति और छत्तीसगढ़ में लागू खनिज नियमों के अनुसार तय होगा।
कलेक्टर ने खनिज विभाग को दिए कार्रवाई के निर्देश
मामले को लेकर कलेक्टर रणबीर शर्मा द्वारा खनिज विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अब विभाग की जिम्मेदारी है कि संबंधित स्थल का निष्पक्ष निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे। यह जांचना जरूरी होगा कि रेत उत्खनन स्वीकृत सीमा के भीतर हो रहा है या बाहर, नदी की पिचिंग को नुकसान पहुंचाया गया है या नहीं तथा निकाली गई रेत के संबंध में वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं।
यदि अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही नदी तट को हुए नुकसान का आकलन कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत होगी।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिंगेश्वर नगर पंचायत क्षेत्र में रेत उत्खनन को लेकर उठे सवालों के बीच अब निगाहें खनिज विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। गणेशपुर की स्वीकृत खदान और कथित रूप से दूसरे स्थान पर हो रहे उत्खनन की वास्तविक स्थिति सामने आना जरूरी है। यदि नियमों को दरकिनार कर नदी से रेत निकाली जा रही है और पिचिंग को नुकसान पहुंचाया गया है, तो मामले में जिम्मेदारी तय कर प्रभावी कार्रवाई करना आवश्यक होगा।
अब देखना होगा कि खनिज विभाग मौके पर पहुंचकर जांच करता है या नहीं और जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।