Swastik Sign : वेदों में स्वस्तिक (Swastik Sign) को सम्पूर्ण विश्व के कल्याण और अमरत्व का प्रतीक माना गया है। वैदिक ऋषियों ने अपने आध्यात्मिक अनुभवों के आधार पर कुछ विशेष चिह्नों का निर्माण किया है, जिनमें स्वस्तिक एक महत्वपूर्ण चिह्न है।
स्वस्तिक (Swastik Sign) की चार रेखाएँ चार वेदों, चार पुरूषार्थों, चार आश्रमों, चार लोकों और चार देवताओं—ब्रह्मा, विष्णु, महेश और गणेश—से संबंधित मानी गई हैं। इसे सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। आइए, आज हम आपको स्वस्तिक के बारे में और अधिक जानकारी प्रदान करते हैं।
स्वस्तिक का महत्व (Swastik Sign)
स्वस्तिक का धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है। इसका अर्थ है – कल्याण या मंगलकारी। स्वस्तिक एक विशिष्ट आकृति है, जिसे किसी शुभ या मांगलिक कार्य से पहले बनाया जाता है।
इसे भगवान गणेश का प्रतीक भी माना जाता है। इसके उपयोग से सम्पन्नता, समृद्धि और एकाग्रता की प्राप्ति होती है। जिन पूजा-अर्चनाओं में स्वस्तिक का प्रयोग नहीं किया जाता, वे लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह पातीं।
स्वस्तिक की विशेषता (Swastik Sign)
स्वस्तिक (Swastik Sign) को ब्रह्माण्ड का प्रतीक माना जाता है। इसके मध्य भाग को विष्णु की नाभि और चारों रेखाओं को ब्रह्मा के चार मुख, चार हाथ और चार वेद के रूप में देखा जाता है। स्वस्तिक की चार बिंदुएं चारों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इसे विष्णु का आसन और लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। स्वस्तिक का चिह्न भाग्यवर्धक वस्तुओं में शामिल है। चंदन, कुमकुम और सिंदूर से निर्मित स्वस्तिक ग्रह दोषों को दूर करने में सहायक होता है।

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