Raji

धर्मनगरी राजिम का नहीं हो पाया विकास, स्वास्थ्य सुविधा और सड़कें बेहाल

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की राजिम, प्रदेश का यह सबसे प्राचीन शहर है। धर्म नगरी राजिम में सातवीं शताब्दी से लेकर 14वीं शताब्दी तक प्राचीन कालीन मंदिर हैं। जिनमें प्रमुख रूप से राजीवलोचन, राज राजेश्वर नाथ महादेव, कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर, महामाया मंदिर, दत्तात्रेय, तुलजा भवानी, साक्षी गोपाल सहित यहां चौरासी मंदिर  हैं। इसलिए देशभर से लोग बड़ी संख्या में यहां आते हैं। ‘राजिम कल्प कुंभ’ शुरू होने के साथ देश-दुनिया के नक्शे में तेजी से उभरी है। हालांकि राजनीतिक और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण आज भी यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।

आध्यात्मिक रूप से गरियाबंद अधिक महत्व रखता है। राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। दावे भी खूब किए जाते हैं। पर जमीनी स्तर पर कोई काम सरकार की नजर नहीं आती। साल भर में यहां एक बार राजिम कुंभ मेला का आयोजन खूब वाहवाही बटोरी जा रही है। इसके सिवाय कोई विकास कार्य यहां धरातल पर नहीं है। यहां सड़कों की स्थिति खराब ही नहीं बहुत ही खराब है। स्वास्थ्य सुविधाओं का भी यही हाल है।

यहां के लोगों को आज भी चिकित्सा सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। शिक्षा व्यवस्था का भी लगभग यही हाल है। यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास एवं निर्माण कार्य के बहाने क्षेत्र की जनता को गुमराह किया है। क्षेत्र में विकास कार्य केवल कागजों पर हो रहा है। क्षेत्र में विकास कार्य के कितने भी दावे ठोक लिये जाएं, क्षेत्र की जनता किसी भी चीज से अंजान नहीं है और इसका माकूल जवाब आगामी चुनाव में दे भी सकती है। 

राजिम में सर्व सुविधायुक्त बस स्टैंड की मांग वर्षों से की जा रही है, जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है। राजिम को जिला बनाने की मांग 38 वर्षों से की जा रही है, यह मांग भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ण्ने बताया कि पुन्नी मेला देखने व पर्यटन के लिए यहां आने वाले सैलानियों के लिए धर्मशाला या रहने के लिए कोई अन्य व्यवस्था नहीं है। कई बार बोलने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 

पथर्रा से छुरा जाने वाली सड़क की स्थिति वर्षा के दिनों में बहुत बुरी हो जाती है। मार्ग की हालत अनेक वर्षों से खराब है। कई बार मांग करने के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी है। बोरसी ग्राम के नजदीक बासीन में मुख्य मार्ग पर शराब दुकान है। यहां असामाजिक लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक ने पिछले चुनाव में उसे हटाने का वादा किया था, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया है। इससे लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस चुनाव में यह अहम मुद्दा बन सकता है। 

कृषि प्रधान इलाका होने के कारण इस क्षेत्र में किसानों से जुड़ी समस्याएं और मुद्दे चुनाव में हावी रहते हैं। लेकिन अब यहां की जनता उद्योग को लेकर भी सरकार से सवाल पूछ रही है। क्योंकि उद्योग नहीं होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए दूसरे जिले या राज्य में पलायन करना पड़ता है। राजिम को तीर्थ स्थल घोषित करने के बाद करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए गए हैं, लेकिन तीर्थ नगरी के लोगों की समस्याओं को नहीं सुना गया। इस बार आगामी विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी, शिक्षा और उद्योगों की कमी का मुद्दा राजिम विधानसभा में जमकर उठेगा।