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अद्भूत! छत्तीसगढ़ में 5 सालों में सिर्फ 0.5 प्रतिशत सिंचाई क्षमता में इजाफा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। सरकारी दावों के मुताबिक पांच साल में ही 12 लाख से अधिक किसान बढ़ गए, पर सिंचाई क्षमता में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। पिछले पांच सालों के दौरान केवल 0.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। छत्तीसगढ़ में मार्च 2019 में राज्य की सिंचाई क्षमता 20.99 लाख हेक्टेयर थी। जल संसाधन विभाग के मुताबिक दिसम्बर 2022 तक 21.49 लाख हेक्टेयर हो गई है। मतलब इन पांच सालों के दौरान प्रदेश में महज 0.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बढ़ी है।

अविभाजित मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ जब अलग हुआ तो वर्ष 2000 में प्रदेश में जल संसाधन के बांधों और नहरों में 13.28 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता थी। उस समय पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने इसका विस्तार किया और 2004 में पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के सत्ता में आने के समय राज्य में निर्मित सिंचाई क्षमता 15 लाख 51 हजार हेक्टेयर पहुंची। वहीं वर्ष 2018 में निर्मित सिंचाई क्षमता 20 लाख 88 हजार हेक्टेयर थी। वर्ष 2018 से 2023 तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में निर्मित सिंचाई क्षमता 21.40 लाख हेक्टेयर है। 

वर्तमान सरकार का दावा है कि किसानों को सिंचाई की सुविधा देने के मकसद से राज्य में सिंचाई विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में सिंचाई क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से वर्ष 2028 तक उपलब्ध सतही जल से 32 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता प्राप्त कर 100 प्रतिशत सिंचाई क्षमता का सृजन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन 2018 से लेकर 2023 तक सिंचाई को लेकर जो काम हुए उसे देखकर नहीं लगता कि सरकार अपनी लक्ष्य को हासिल कर पाएगी। 

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने जो काम अधूरे छोड़े थे, उसे भी कांग्रेस सरकार पूरी नहीं कर पायी। 2018-19 में 8 वृहद परियोजना निर्मित थे, 4 निर्माणाधीन थे। 2022-23 की स्थिति में आज भी वृहद सिंचाई परियोजना 8 ही है और 4 निर्माणाधीन आज भी है। मतलब जो निर्मणाधीन थे वे इन पांच सालों में पूरे नहीं हुए। इसी तरह मध्यम परियोजना 2018-19 में 37, निर्माणाधीन 1, पांच सालों में केवल एक निर्माणाधीन काम पूरे हुए, अब प्रदेश में मध्यम परियोजना की स्थिति 38 है। लघु परियोजनाओं की संख्या 2018-19 में 2468 थी और अधूरे प्रोजेक्ट की संख्या 391 थी। पांच साल बाद इनकी संख्या 2477 है और अधूरे कार्याे की 340 मतलब पुराने में से 51 प्रोजेक्ट को सरकार पूरे कर पायी। इसी तरह का हाल एनीकट और स्टॉपडैम को लेकर भी है। 2018-19 में इनकी संख्या 685 थी और 147 निर्माणाधीन, अब 806 है। वर्तमान सरकार ने कुछ एनीकट और स्टॉपडैम का निर्माण जरुर किया है, पर निर्माणाधीन की संख्या 147 से बढ़कर 199 हो गई है। 

 

टिकटों को लेकर मचे घमासान से मंडरा रहे ‘विद्रोह के तूफानी बादल’

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को अंदरूनी कलह का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव के टिकट के इच्छुक उम्मीदवारों की संख्या बढ़ रही है और कई लोगों को नामांकन से वंचित कर दिया गया है, जो उसे सबक सिखाने की धमकी दे रहे हैं। कई नेताओं ने तो नामांकन फार्म तक खरीद लिया है और कुछ नामांकन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में टिकटों को लेकर मचे घमासान के मंडरा रहे ‘विद्रोह के तूफानी बादल’ कांग्रेस के लिए खतरे की घंटे है। 

बता दें कि छत्तीसगढ़ के 90 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव होना है। इसमें 7 नवंबर को 20 विस सीटों के लिए वोटिंग होगी तो वहीं शेष 70 सीटों पर 17 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। रिजल्ट 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। 20 अक्टूबर को नामांकन फार्म जमा करने का अंतिम दिन है। छत्तीसगढ़ के मुख्य राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और भाजपा ने पहले चरण में होने वाले चुनाव के लिए सभी विस सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस ने अब तक 90 में से 83 और भाजपा ने 86 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। 

कांग्रेस पार्टी ने नवरात्र के पहले दिन 30 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसमें मौजूदा 8 विधायकों के टिकट काटे थे। जिनमें पंडरिया विधानसभा से ममता चंद्राकर, खुज्जी से छन्नी साहू, दंतेवाड़ा से देवती कर्मा, अंतागढ़ से अनूपनाग, कांकेर से शिशुपाल सोरी, चित्रकोट से राजमन बेंजाम, डोंगरगढ़ से भुनेश्वर बघेल और नवागढ़ से गुरूदयाल बंजारे शामिल हैं। इन सीटों पर पहले चरण में चुनाव होना है। नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में कुछ मौजूदा विधायकों ने पार्टी से विद्रोह करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इनमें अंतागढ़ से अनूप नाग, डोंगरगढ़ से भुनेश्वर बघेल और चित्रकोट से राजमन बेंजाम द्वारा नामांकन फार्म लेने की चर्चा है। 

दूसरी ओर बुधवार को 53 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की गई है। इनमें भी 10 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे गए हैं। इनमें धरसींवा से अनिता शर्मा, लैलूंगा से चक्रधर सिंह सिदार, बिलाईगढ़ से चंद्रदेव राय, रामानुजगंज से बृहस्पत सिंह, सामरी से चिंतामणी महाराज, पाली तानाखार से मोहित केरकेट्‌टा, मनेंद्रगढ़ से विनय जायसवाल, प्रतापपुर से प्रेमसाय टेकाम, जगदलपुर से रेखचंद जैन और रायपुर ग्रामीण से सत्यनारायण शर्मा शामिल हैं। हालांकि सत्यनारायण शर्मा पहले ही ऐलान कर चुके थे कि इस बार वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने अपने बेटे पंकज शर्मा के लिए टिकट मांगी थी। पार्टी ने उनकी बात मानी और पंकज को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में उनका टिकट कटना कहना गलत होगा। 

अब इनमें भी कुछ लोगों के निर्दलीय लड़ने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे चरण के तहत मतदान होना है। इसलिए यहां नामांकन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। नामांकन फार्म की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा कौन पार्टी से बगावत कर लड़ेगा या फिर पार्टी मनाने में कामयाब होगी। 

 

 

 

न तो बेरोजगार इंजीनियर ठेकेदार बन पाए और न ही इंजीनियरों को नौकरी मिली….

रायपुर। छत्तीसगढ़ में चार साल पहले अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापनों और शहर से लेकर गांंवों तक चौक-चौराहों में बड़े-बड़े बैनर-पोस्टर के साथ ढिढौंरा पीटा गया कि अब प्रदेश के बेरोजगार इंजीनियरों को सरकारी निर्माण कार्य के कॉन्ट्रैक्ट में नौकरी अनिवार्य बल्कि 20 लाख रुपए तक का सरकारी ठेका भी मिलेगा, पर अफसोस की इस सरकारी दावे की हवा निकल गई और बेरोजगार इंजीनियर आज भी बेराेजगार बैठे हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि प्रदेश सरकार के आंकड़े खुद ही इसकी गवाही दे रहे। 

राज्य सरकार का दावा था कि बेरोजगारी से जूझ रहे इंजीनियरों को राहत देने के लिए  PWD के साथ-साथ सभी निर्माण विभागों, निकायों, मंडलों, बोर्ड के ठेकों में ई श्रेणी पंजीयन प्रणाली लागू का निर्णय लिया है जिससे स्थानीय बेरोजगार इंजीनियरों को काम अब ब्लॉक स्तर पर ही मिल सकेंगे। यह भी दावा था कि लोक निर्माण विभाग की ओर से निर्माण कार्यों के कांट्रेक्ट में 20 लाख रुपए से अधिक लागत के कार्यों में डिप्लोमा इंजीनियर की नियुक्ति को अनिवार्य किया गया है। साथ ही एक करोड़ से अधिक के कार्यों में स्नातक इंजीनियर की नियुक्ति की जाएगी। डिप्लोमा इंजीनियर को 15 हजार रुपए और स्नातक इंजीनियर को 25 हजार रुपए न्यूनतम वेतन का प्रति माह भुगतान किया जाएगा।

आंकड़ों पर नजर डाले तो प्रदेश सरकार की यह योजना भी न सिर्फ कागजों में सिमटा, बल्कि सिविल इंजीनियरों की शिकायत रही कि लोक निर्माण विभाग समेत दूसरे विभागों से जारी होने वाले टेंडर में उन्हें किसी प्रकार की प्राथमिकता नहीं दी जाती है। पूरा निर्माण कार्य बड़े ठेकेदारों के पास जा रहा है। इसके बाद भी प्रदेश सरकार ने इसे संज्ञान में नहीं लिया और योजना पूरी तरह से फेल हो गई। जबकि इस योजना के प्रचार प्रसार में ही करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया गया था। 

वैसे बता दें कि इस योजना को प्रदेश में 2005-2006 में बीजेपी की सरकार ने प्रदेश में लागू की थी। पहले साल बीजेपी की ओर से 40 स्नातक इंजीनियरों को 2 करोड़ रुपए से अधिक के काम दिए गए थे। 2 डिप्लोमा इंजीनियर को 12 लाख रुपए से अधिक के काम मिले। योजना की शुरूआत में बेरोजगार इंजीनियरों ने इसमें ज्यादा रूचि नहीं दिखाई दी, लेकिन दूसरे साल इंजीनियरों में इस योजना को लेकर उत्साह नजर आया। 326 स्नातक इंजीनियरों को 17 करोड़ रुपए से अधिक के काम मिले। 19 डिप्लोमा इंजीनियर्स को लगभग 57 लाख के काम दिए गए थे। इसके अलावा 345 राज मिस्त्रियों को भी 18 करोड़ रुपए के काम बांटे गए। 

2007-08 में इसमें और भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 562 ग्रेजुएट इंजीनियरों ने काम के लिए अप्लाई किया। सरकार ने 29 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम दिए। इसी तरह 198 डिप्लोमा इंजीनियरों को 7 करोड़ 62 लाख रुपए का काम मिला। जबकि 760 राजमिस्त्री को लगभग 37 करोड़ रुपए के काम मिले। बीजेपी शासनकाल के दौरान 2018 तक औसतन हर साल 300 इंजीनियरों को करोड़ों रुपए के काम मिलते रहे। पर पिछले पांच सालों में इस योजना में गिरावट नजर आयी। 

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार 2018 में आयी। यह योजना छत्तीसगढ़ में 2005-06 से चालू थी। पर ऐसा सरकार ने ऐसे दिखाया कि यह योजना अभी शुरू की जा रही है। हालांकि इसमें कुछ बदलाव जरुर किए गए, पर इस बदलाव को बेरोजगार इंजीनियरों को फायदा नहीं मिला। 2018-19 में 60 स्नातक इंजीनियरों को साढ़े 12 करोड़ रुपए के काम मिले। जबकि 41 डिप्लोमा इंजीनियरों को 4 करोड़ के काम दिए। राज मिस्त्री को कोई काम नहीं मिला। 2019-20 में 45 ग्रेजुएट इंजीनियरों को लगभग 14 करोड़, 9 डिप्लोमा इंजीनियरों को 1 करोड़ 28 लाख के काम दिए। वहीं 2020-21 में 46 ग्रेजुएट इंजीनियरों को 11 करोड़ 26 लाख, 24 डिप्लोमा इंजीनियर्स को लगभग 4 करोड़ के काम मिला। 2021-22 में इसकी संख्या लगभग आधी हो गई और 29 ग्रेजुएट इंजीनियरों को मात्र 7 करोड़ 20 लाख तो 9 डिप्लोमा इंजीनियर को 1 करोड़ के काम दिए। 2022-23 और 2023-24 में अब तक स्थिति और भी खराब है। 2022 में मात्र 9 ग्रेजुएट इंजीनियर को लगभग 3 करोड़ और 10 डिप्लोमा इंजीनियर को 1 करोड़ 73 लाख के काम दिए। इस साल अब तक 7 स्नातक इंजीनियरों को 1 करोड़ 38 लाख रुपए के काम मिले हैं तो वहीं 8 डिप्लोमा इंजीनियर को डेढ़ करोड़ रुपए के काम दिए गए हैं। 

प्रदेश सरकार ने जिस तामझाम के साथ इस योजना को रिलांच किया। उस हिसाब से बेरोजगार इंजीनियरों को काम ही नहीं मिला। पीडब्ल्यूडी, पीएचई, पीएमजेएसवाई समेत तमाम विभागों में बड़े ठेकेदारों का बोलबाला रहा। बिना कमीशन काम न मिलने की भी शिकायतें मिलती रही। नतीजा यह रहा है कि आज भी इंजीनियर काम की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। अगर कहीं चपरासी की वैकेंसी भी निकलने पर इंजीनियर लाइन में लगे नजर आते हैं। 

 

 

Year Of Agreement
Graduate Engineers
Diploma Engineers
Rajmistries
Total No. of Works
Total Value of Works
Nos.
Amount
Nos.
Amount
Nos.
Amount
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
1
2023-2024
7
138.68
8
157.87
0
0
15
296.55
2
2022-2023
9
296.09
10
173.90
0
0
19
469.99
3
2021-2022
29
720.12
9
118.63
0
0
38
838.75
4
2020-2021
46
1126.21
24
391.52
0
0
70
1517.73
5
2019-2020
45
1391.61
9
128.36
0
0
54
1519.97
6
2018-2019
60
1258.64
41
434.29
0
0
101
1692.93
7
2017-2018
114
3187.29
115
1573.74
0
0
229
4761.03
8
2016-2017
181
5170.58
165
2443.93
0
0
346
7614.51
9
2015-2016
265
2765.48
85
1056.32
0
0
350
3821.80
10
2014-2015
165
1603.02
2
15.17
0
0
167
1618.19
11
2013-2014
71
847.04
13
98.76
0
0
84
945.80
12
2012-2013
125
1426.72
73
444.84
0
0
198
1871.56
13
2011-2012
347
3765.33
270
1600.16
0
0
617
5365.49
14
2010-2011
414
11977.61
271
50997.82
0
0
685
62975.43
15
2009-2010
417
5030.27
325
1851.36
0
0
742
6881.63
16
2008-2009
311
1633.63
171
649.18
0
0
482
2282.81
17
2007-2008
562
2924.45
198
762.00
0
0
760
3686.46
18
2006-2007
326
1772.54
19
56.68
0
0
345
1829.22
19
2005-2006
40
201.96
2
12.10
0
0
42
214.06
20
2004-2005
1
68.02
0
0.00
0
0
1
68.02
21
2003-2004
2
6.40
8
131931.60
0
0
10
131938.00
22
2002-2003
2
30.82
0
0.00
0
0
2
30.82
Grand Total
3539
47342.52
1818
194898.23
0
0
5357
242240.75