Raipur News : औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने पखवाड़े भर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 उद्योगों का उत्पादन बंद कराने तथा विद्युत आपूर्ति विच्छेदित करने की कार्रवाई की है। मंडल द्वारा की गई यह व्यापक कार्रवाई औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से प्रदूषण नियंत्रण अभियान (Environmental Compliance Action) के तहत की गई है।
मंडल द्वारा 10 फरवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 के बीच नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान कई औद्योगिक इकाइयों में वायु एवं जल प्रदूषण से संबंधित गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले उद्योगों के विरुद्ध वैधानिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई करते हुए उत्पादन बंद और बिजली विच्छेदन के आदेश जारी किए गए। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई पर्यावरणीय अनुपालन निगरानी (Environmental Compliance Action) का हिस्सा है, जिसे आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा।
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स्पंज आयरन उद्योग पर सख्त कार्रवाई
ग्राम चरौदा, तहसील एवं जिला रायपुर स्थित स्पंज आयरन उद्योग मेसर्स पुष्प स्टील्स एंड माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व नाम इंडियन स्टील एंड पॉवर प्रा. लिमिटेड) में निरीक्षण के दौरान गंभीर वायु प्रदूषण पाया गया। इसके बाद वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31(क) के अंतर्गत उत्पादन बंद करने एवं विद्युत विच्छेदन के आदेश जारी किए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उद्योग द्वारा प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का प्रभावी संचालन नहीं किया जा रहा था, जिससे आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा था। यह कार्रवाई औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण अभियान (Environmental Compliance Action) के तहत की गई।
मेटल पार्क रावांभाठा में 11 इकाइयों पर कार्रवाई
मेटल पार्क, रावांभाठा क्षेत्र में किए गए संयुक्त निरीक्षण के दौरान 11 औद्योगिक इकाइयां बिना वैध पर्यावरणीय सम्मति के संचालित पाई गईं। इनमें 09 स्लैग क्रशर इकाइयां, 01 बाइंडिंग वायर इकाई तथा 01 स्टील फर्नीचर निर्माण इकाई शामिल हैं। इन सभी इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। मंडल ने वायु अधिनियम 1981 की धारा 31(क) तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 की धारा 33(क) के तहत उत्पादन बंद और बिजली काटने की कार्रवाई की। इसे अनधिकृत औद्योगिक संचालन रोकथाम (Environmental Compliance Action) की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
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सिलतरा और उरला औद्योगिक क्षेत्र भी जांच के दायरे में
सिलतरा स्थित इण्डक्शन फर्नेस उद्योग मेसर्स एसकेए इस्पात प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व नाम जोरावर इंजीनियरिंग एंड फाउंड्री फोर्ज प्रा. लिमिटेड) में वायु प्रदूषण पाए जाने पर 19 फरवरी 2026 को उत्पादन बंद करने और विद्युत विच्छेदन के आदेश जारी किए गए। इसी प्रकार उरला-गोंदवारा क्षेत्र में संचालित मेसर्स छत्तीसगढ़ फेरो ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड में भी निरीक्षण के दौरान प्रदूषण संबंधी उल्लंघन पाए गए, जिसके बाद उद्योग के संचालन पर रोक लगा दी गई। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई औद्योगिक पर्यावरण सुरक्षा अभियान (Environmental Compliance Action) का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
9.22 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित
सिर्फ उत्पादन बंद करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि नियमों के उल्लंघन की अवधि को ध्यान में रखते हुए मंडल द्वारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी अधिरोपित की गई। कुल तीन उद्योगों पर 9 लाख 22 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि लगाई गई है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि यह राशि प्रदूषण से हुए संभावित पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के उद्देश्य से निर्धारित नियमों के तहत लगाई गई है। यह कदम पर्यावरणीय दायित्व निर्धारण प्रक्रिया (Environmental Compliance Action) के तहत उठाया गया है।
मंडल ने संबंधित उद्योगों को निर्देशित किया है कि जब तक वे सभी पर्यावरणीय मानकों, वैधानिक प्रावधानों तथा सम्मति शर्तों का पूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं करते, तब तक उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना, नियमित मॉनिटरिंग और उत्सर्जन मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है।
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निरीक्षण अभियान रहेगा जारी
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास के आवासीय इलाकों में निरीक्षण अभियान लगातार जारी रखने की बात कही गई है। मंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी उद्योग से प्रदूषक गैस उत्सर्जन, धूल प्रदूषण या दूषित जल निस्सारण पाए जाने पर वायु एवं जल अधिनियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई से उद्योगों में पर्यावरणीय जवाबदेही बढ़ेगी और औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। प्रशासन का लक्ष्य औद्योगिक गतिविधियों को रोकना नहीं बल्कि उन्हें पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालित करना है, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
