Budget 2026 : देश में 26 साल बाद रविवार के दिन शेयर बाजार (Budget 2026 Sunday Trading) खुलने जा रहा है। केंद्रीय बजट 2026 इसी दिन पेश किया जाएगा और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 फरवरी 2026 को भी शेयर बाजार सामान्य समय पर खुला रहेगा। इस दिन बजट पेश होने के बावजूद निवेशक इक्विटी, डेरिवेटिव्स और अन्य सेगमेंट्स में नियमित रूप से ट्रेड कर सकेंगे, क्योंकि दोनों एक्सचेंजों ने कहा है कि ट्रेडिंग का समय सामान्य रहेगा और कोई खास सेशन या समय में कटौती नहीं की जाएगी।
ये भी पढ़े : Chhattisgarh Irrigation Projects : खेती बनेगी और आसान! सरकार ने दी 7.36 करोड़ की सिंचाई योजनाओं को हरी झंडी
NSE ने अपने सर्कुलर में कहा है कि बजट (Budget 2026 Sunday Trading) पेश होने के कारण 1 फरवरी को एक्सचेंज में रेगुलर मार्केट टाइमिंग के अनुसार लाइव ट्रेडिंग होगी। यानी बजट भाषण के दौरान भी बाजार चालू रहेगा और निवेशक बजट में घोषित नीतियों व घोषणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकेंगे। यह कदम पिछले कुछ वर्षों से बन चुकी परंपरा का ही हिस्सा है, ताकि बाजार में पारदर्शिता बनी रहे और निवेशकों को त्वरित निर्णय लेने का अवसर मिले।
यह कोई नया प्रयोग नहीं है, लेकिन 1 फरवरी 2026 का दिन खास इसलिए भी है क्योंकि 26 साल बाद रविवार को बजट (Budget 2026 Sunday Trading) पेश किया जा रहा है। इससे पहले 28 फरवरी 1999 को तत्कालीन वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने रविवार के दिन बजट पेश किया था। उस समय बजट का समय भी बदला गया था और एक पुरानी परंपरा तोड़ते हुए बजट सुबह 11 बजे पेश किया गया, जबकि इससे पहले शाम 5 बजे बजट पेश किया जाता था। तब के बाद 1999 में ही रविवार को बजट पेश होने की परंपरा देखने को मिली थी।
ये भी पढ़े : Manendragarh Free Job Fair : युवाओं के लिए रोजगार का मौका, 18-20 हजार वेतन
लोकसभा अध्यक्ष पहले ही यह पुष्टि कर चुके हैं कि 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। इस बार बजट 2026 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा। उन्होंने इससे पहले भी शनिवार को बजट पेश किया है, जबकि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015 और 2016 में शनिवार को बजट पेश किया था।
गौरतलब है कि 2017 से सरकार ने बजट पेश (Budget 2026 Sunday Trading) करने की तारीख 28 फरवरी से बदलकर 1 फरवरी कर दी थी। इसका उद्देश्य यह था कि बजट में घोषित योजनाएं और नीतियां नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से ही लागू की जा सकें।
