छत्तीसगढ़ की राजनीति को दो दशक पहले दहला देने वाले ‘राम अवतार जग्गी हत्याकांड’ में आज न्यायपालिका ने एक ऐतिहासिक लकीर खींच (Amit Jogi Convicted) दी है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस चर्चित मामले में अपना बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डबल बेंच ने अमित जोगी को धारा 302 और 120-बी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
क्या था हाईकोर्ट का तर्क? (Amit Jogi Convicted)
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में सीबीआई (CBI) की अपील को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के 2007 के उस निर्णय को त्रुटिपूर्ण माना, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:
“जब एक ही साक्ष्य और गवाहों के आधार पर अन्य 28 आरोपियों को सजा दी गई, तो मुख्य साजिशकर्ता को उसी आधार पर बरी करना कानूनी रूप से तर्कसंगत नहीं है।” कोर्ट ने अमित जोगी पर 1,000 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
2003 की वो काली रात और सियासी भूचाल
घटना 4 जून 2003 की है, जब एनसीपी (NCP) के कद्दावर नेता और विद्याचरण शुक्ल के करीबी रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी (Amit Jogi Convicted) गई थी। उस वक्त छत्तीसगढ़ की सियासत में इस घटना ने तूफान खड़ा कर दिया था। तत्कालीन जोगी सरकार पर गंभीर आरोप लगे थे। मामले में कुल 31 आरोपी थे, जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए थे। 2007 में रायपुर की निचली अदालत ने 28 लोगों को तो सजा सुनाई, लेकिन सबूतों की कमी बताते हुए अमित जोगी को दोषमुक्त कर दिया था।
सतीश जग्गी की लंबी कानूनी लड़ाई
पिता को न्याय दिलाने के लिए सतीश जग्गी ने हार नहीं मानी। निचली अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती (Amit Jogi Convicted) दी गई। शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप के बाद मामला पुनः खुला और हाईकोर्ट में गहन सुनवाई हुई। आज के फैसले ने यह साबित कर दिया कि कानून की नजर में कोई भी रसूखदार व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं है।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट से सजा के ऐलान के तुरंत बाद अमित जोगी की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख (Amit Jogi Convicted) किया है। एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की गई है, जिस पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है। हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले ने छत्तीसगढ़ की वर्तमान राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है।
