Modern Farming Techniques : जहां चाह वहां राह इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है, (Modern Farming Techniques) आदिवासी बहुल कोण्डागांव विकासखण्ड के ग्राम ठोटीमडानार के रहने वाले युवा किसान गोविन्द कोर्राम ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। गोविन्द अपने पिता 55 वर्षीय किसान शोभी राम कोर्राम के साथ मिलकर खेती करते हैं और आज वे गांव के अन्य किसानों के लिए एक मिसाल बन चुके हैं।
गोविन्द परिवार में दूसरे नंबर के बेटे हैं। उनकी एक बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि एक छोटा भाई वर्तमान में आईटीआई से कंप्यूटर का प्रशिक्षण ले रहा है। बहन की शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारी गोविन्द पर भी आ गई, जिसके चलते वे अपनी पढ़ाई बीए सेकंड ईयर तक ही पूरी कर सके। कम उम्र में ही परिवार और खेती (Modern Farming Techniques) की जिम्मेदारी संभालते हुए गोविन्द ने खेती को ही अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया।
गोविन्द बताते हैं कि उनके पिता पूर्वजों की परंपरा के अनुसार लंबे समय से पारंपरिक तरीके से खेती (Modern Farming Techniques) करते आ रहे थे। पारंपरिक खेती में मेहनत और लागत अधिक लगती थी, जबकि उत्पादन कम होता था। इससे परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से हो पाता था। समय के साथ घर की जरूरतें बढ़ती जा रही थीं, लेकिन आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही थी।
इसी स्थिति ने गोविन्द को सोचने पर मजबूर किया कि खेती (Modern Farming Techniques) को लाभ का व्यवसाय कैसे बनाया जाए। उन्होंने अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफे के लिए आधुनिक खेती तकनीक लाभको अपनाने का निर्णय लिया। गोविन्द बताते हैं कि उनके पिता केवल पांचवीं तक शिक्षित हैं, लेकिन खेती-किसानी से जुड़े निर्णयों में पिता और बेटे की सोच हमेशा एक जैसी रही। दोनों ने मिलकर यह तय किया कि यदि सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाए, तो खेती से भी अच्छी आमदनी संभव है।
श्री शोभी राम के नाम पर कुल 3.5 एकड़ कृषि भूमि है। योजना का लाभ लेने से पहले इसी भूमि पर पारंपरिक तरीके से सब्जी की खेती की जाती थी। उत्पादन कम होने और लागत अधिक होने के कारण शुद्ध वार्षिक आय लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये तक ही सीमित थी। इससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
करीब दो वर्ष पूर्व गोविन्द को राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत संचालित नवीन तकनीक योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने पिता के नाम से योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया। उद्यानिकी विभाग से संपर्क होने के बाद उनकी खेती का तरीका पूरी तरह बदल गया। विभाग द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के आधार पर उन्होंने आधुनिक खेती तकनीक लाभ के तहत ड्रीप सिंचाई (Modern Farming Techniques) एवं मल्चिंग प्रणाली अपनाकर सब्जी उत्पादन शुरू किया।
ड्रीप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाने से खेती में कई सकारात्मक बदलाव आए। पानी की बचत हुई, उर्वरकों का सही उपयोग संभव हुआ और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार आया। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा और पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
3 एकड़ में ड्रिप सिंचाई पद्धति से खेती
वर्तमान में परिवार अपनी लगभग 3 एकड़ भूमि में ड्रिप सिंचाई पद्धति से मिर्च, बैंगन, करेला एवं अदरक की बड़े पैमाने पर खेती (Modern Farming Techniques) कर रहा है। विशेष रूप से पूर्व में जहाँ मिर्च की खेती में प्रति एकड़ लगभग 100 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हो रहा था वहीं योजना का लाभ लेने के बाद अब कुल 210 क्विंटल मिर्च का उत्पादन हो रहा है, जिससे उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 3 लाख 65 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

गोविन्द के अनुसार आधुनिक खेती (Modern Farming Techniques) तकनीक लाभ से सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि फसल की गुणवत्ता और आकार में सुधार के साथ-साथ बाजार में बिकवाली भी बेहतर हुई। अब उनके उत्पाद को स्थानीय मंडी के साथ-साथ निकटवर्ती शहरों में भी मांग मिलने लगी है। इससे उनके उत्पाद की कीमत भी बेहतर मिल रही है।
आय में हुई इस बढ़ोतरी से परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। अब परिवार ने एक ट्रैक्टर खरीदा है, जिससे खेती के कार्य आसान हो गए हैं। आवागमन के लिए घर में तीन मोटरसाइकिलें हैं और परिवार ने पक्का मकान भी बना लिया है। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रहन-सहन के स्तर में भी सुधार देखने को मिला है।
गोविन्द की इस सफलता को देखकर आसपास के किसान भी उनसे सलाह लेने आने लगे हैं। कई किसान अब पारंपरिक खेती (Modern Farming Techniques) छोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को नई पहचान मिल रही है। गोविन्द का कहना है कि आधुनिक खेती तकनीक लाभ के साथ सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।
(Modern Farming Techniques) भविष्य का व्यवसाय मानने लगे हैं युवा
गोविन्द के गांव में यह परिवर्तन केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। गाँव के युवा अब खेती को केवल परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य का व्यवसाय मानने लगे हैं। कई युवा किसान आज ड्रीप सिंचाई, मल्चिंग, उन्नत बीज, जैविक खाद एवं रोग-प्रतिरोधक तकनीकों को अपनाकर खेती में कदम रख रहे हैं। गोविन्द ने गांव के अन्य किसानों के साथ मिलकर एक समूह भी बनाया है, जिसमें वे नियमित रूप से कृषि संबंधी जानकारियों, बाजार भाव, सरकारी योजनाओं और तकनीकी प्रशिक्षण की जानकारी साझा करते हैं।
ग्राम ठोटीमडानार में गोविन्द के प्रयासों ने यह संदेश दिया है कि यदि इच्छाशक्ति, सही दिशा और आधुनिक तकनीक मिल जाए तो खेती से भी परिवार का जीवन स्तर बदल सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में ऐसे युवा किसानों की भूमिका अहम होती जा रही है।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गोविन्द जैसे किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने गांवों में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। विभाग किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, सिंचाई उपकरण, उन्नत बीज और कृषि मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उनकी क्षमता बढ़ाने का काम कर रहा है।
क्षेत्र में खेती की दिशा भी बदलने का बीड़ा
इस प्रकार आधुनिक खेती (Modern Farming Techniques) की प्रेरणा से गोविन्द कोर्राम ने न केवल अपने परिवार की तस्वीर बदली है, बल्कि पूरे क्षेत्र में खेती की दिशा भी बदलने का बीड़ा उठाया है। उनके प्रयास से यह स्पष्ट हो गया है कि युवा किसान यदि सही तकनीक और सरकारी योजनाओं के साथ खेती को अपनाएं तो ग्रामीण भारत में समृद्धि की नई कहानी लिखी जा सकती है।
गोविन्द की कहानी यह भी बताती है कि कृषि (Modern Farming Techniques) में नवाचार और आधुनिकता को अपनाना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर अब कई युवा किसानों ने अपनी खेती की दिशा बदलने की ठान ली है। आधुनिक खेती तकनीक लाभने गोविन्द को एक प्रेरणादायक किसान बना दिया है, जो आज अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों के लिए खेती की नई मिसाल बन चुका है।
