धूम्रपान और प्रदूषण की वजह से बढ़ रहे सीओपीडी के रोगी

रायपुर। फेफड़ों में कफ की वजह से सांस लेने में दिक्कत (क्रॉनिक आब्स्ट्रेक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के रोगी धूम्रपान और बढ़ते प्रदूषण की वजह से निरंतर बढ़ रहे हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सकों ने ऐसे रोगियों को प्रारंभ में ही उपचार लेने की सलाह दी है। इसके लिए सांस लेने की एक्सरसाइज और योग आसन हैं जिनसे यह बीमारी शीघ्र ठीक हो सकती है। विश्व सीओपीडी दिवस पर एम्स में आयोजित विशेष स्क्रिनिंग कैंप में रोगियों को जागरूक बनाते हुए धूम्रपान और प्रदूषण से दूर रहने की सलाह दी गई। निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने बताया कि पल्मोनरी विभाग में सीओपीडी के रोगी निरंतर बढ़ रहे हैं। युवाओं में धूम्रपान और बढ़ते प्रदूषण इसके मुख्य कारक हैं। ऐसे रोगियों को जल्द स्क्रिनिंग करवाने और उपचार शुरू करने की आवश्यकता होती है। विभाग के डॉ. अजॉय बेहरा ने बताया कि ओपीडी में लगभग 10 प्रतिशत रोगी सीओपीडी के होते हैं। इन्हें शुरू में कफ और सांस लेने में दिक्कत होती है। यदि समय पर उपचार प्रारंभ न किया जाए तो सांस लेने में और अधिक दिक्कतें होने लगती हैं। इसके उपचार के लिए चिकित्सकों की सलाह से सांस लेने की एक्सरसाइज और योग किया जा सकता है। कई वैक्सीन भी सीओपीडी के लिए उपलब्ध हैं। अब इनहेलर के रूप में भी दवाइयां दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि ट्रैफि क पुलिस और औद्योगिक संस्थानों में काम करने वाले कर्मियों को सीओपीडी की दिक्कत हो सकती है। इन्हें नियमित रूप से मास्क का प्रयोग करना चाहिए। एम्स के पल्मोनरी विभाग में सीओपीडी के उपचार के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिसमें पीएफ टी टेस्ट, रेस्पिरोमीटर और डीएलसीओ शामिल हैं। फेफ ड़ों की बीमारियों के लिए विभाग में तीन स्पेशल क्लिनिक भी आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें अस्थमा एलर्जी क्लिनिक (मंगलवार), आईएलडी क्लिनिक (बुधवार) और नींद संबंधी विकारों (गुरुवार) के लिए स्पेशल क्लिनिक शामिल हैं। स्क्रिनिंग कैंप का आयोजन डॉ. दिबाकर साहू और डॉ. टी. रंगनाथ टीजी ने किया।

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