23 बरस का हो चुका अपना छत्तीसगढ़… जानें उच्च शिक्षा का हाल

रायपुर। देश के 26वें राज्य छत्तीसगढ़ का 1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस है। छत्तीसगढ़ अपना 23 साल का सफर पूरा करने जा रहा है। इस राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग कर किया गया था, ये मध्य प्रदेश का करीब 30 फीसदी हिस्सा है। मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्व के हिस्से को अलग कर छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण किया गया है। पिछले 23 वर्षों में अपने राज्य ने विकास और उपलब्धियों का प्रतिमान भी गढ़ा है। बीहड़ जंगल, पहाड़ों तक विकास ने नयी करवट ली है राज्य के सुदूर आदिवासी इलाके में भी बदलाव आया है। आधारभूत संरचना से लेकर कला-संस्कृति, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र तक में छत्तीसगढ़ ने भारत के नक्शे पर जगह बनायी है। जानिए उच्च शिक्षा को लेकर प्रदेश में कितन बदलाव आया। 

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में केंद्रीय विवि 1, शासकीय विवि 15, कुल कॉलेज 536, आदिवासी अंचलों में 108, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 15, एमबीबीएस सीटों की संख्या 2000, आयुर्वेदिक कॉलेजों की संख्या 4, डेंटल कॉलेजों की संख्या 6, नर्सिंग कॉलेज 105, प्रबंधन कॉलेज 13, कृषि और पशु चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या 33, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 30, फार्मेसी कॉलेज 25, पॉलीटेक्निक संस्थान 48, आईटीआई संस्थान 186, लाइवलीहुड़ कॉलेज 1, ट्रिपल आईटी 1, आईआईटी 1, आईआईएम 1, विधि विश्वविद्यालय 1 समेत कुल 1130 कुल विश्वविद्यालय और कॉलेजों की संख्या है। 

छत्तीसगढ़ के 23 साल के इतिहास में केवल 3 मुख्यमंत्री बने हैं। राज्य गठन के बाद सबसे पहले स्व अजीत प्रमोद जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में 1 नवंबर 2000 में शपथ लिए और 5 दिसंबर 2003 तक इनका कार्यकाल चला। प्रदेश में साल 2003 में विधानसभा चुनाव हुआ और बीजेपी ने सरकार बनाई। भारतीय जनता पार्टी ने डॉ रमन सिंह को मुख्यमंत्री बनाया। जिनका कार्यकाल 15 साल तक चला। डॉ रमन 2003 से 2018 तक सत्ता की कुर्सी पर काबिज रहे। इसके बाद 17 दिसंबर 2018 से अब तक भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं।

मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ को विकसित बनाने में तीनों ही मुख्यमंत्री का योगदान रहा। प्रदेश में केवल उच्च शिक्षा को लेकर इनके योगदानों की चर्चा करें तो छत्तीसगढ़ में 16 यूनिवर्सिटी हैं जिसमें से एक केंद्रीय यूनिवर्सिटी है। सबसे पुराना यूनिवर्सिटी इंदिरा कला एवं संगीत यूनिवर्सिटी 1956 से संचालित है। देश विदेश के संगीत प्रेमी यहां पढ़ाई करने आते हैं। इसके बाद 1964 में पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी की शुरुआत हुई। गुरुघासीदास केंद्रीय यूनिवर्सिटी की शुरुआत 1983 में किया गया।  इसके 4 साल बाद इंदिरा गांधी कृषि यूनिवर्सिटी 1987 में शुरू हुआ। 

राज्य के गठन के बाद यहां 12 यूनिवर्सिटी खुले हैं। इसमें हिदायतुल्लता राष्ट्रीय विधि यूनिवर्सिटी 2003 में प्रारंभ हुआ। पंडित सुंदर लाल शर्मा (मुक्ता) यूनिवर्सिटी की शुरुआत 2005 में हुई। इसी साल 2005 में 2 और यूनिवर्सिटी की शुरुआत हुई। इसमें एक कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता यूनिवर्सिटी और छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू हो गई। शहीद महेंद्र कर्मा यूनिवर्सिटी 2008 में खोला गया।

इसी साल 2 और यूनिवर्सिटी सरगुजा में संत गहिरागुरू और रायपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति, स्वास्थय विज्ञान एवं आयुष यूनिवर्सिटी खोले गए। 2012 में अटल बिहारी वाजपेयी और दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु यूनिवर्सिटी खोले गए। इसके बाद 2015 में दुर्ग जिले में हेमचंद यादव यूनिवर्सिटी खोला गया फिर 2020 में दो और यूनिवर्सिटी खोले गए। एक महात्मा गांधी उद्यानिकी और वानिकी और शहीद नंदकुमार पटेल यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई।

राज्य में भाजपा और कांग्रेस शासनकाल में उच्च शिक्षा को लेकर तुलना करें तो बीजेपी कांग्रेस पर भारी नजर आती है। क्योंकि बीजेपी के शासनकाल में 10 यूनिवर्सिटी खुले। जबकि कांग्रेस शासनकाल के दौरान सिर्फ 2। प्रदेश में 2003 में कॉलेजों की संख्या 206 थी जो 2018 तक 482 हो गई। मतलब रमन सिंह के कार्यकाल में 276 कॉलेज खोले गए। वहीं भूपेश बघेल के कार्यकाल में 54 काॅलेज खाेले गए हैं। इनमें अधिकांश कॉलेज 2018 के बीजेपी शासनकाल के प्रक्रियाधीन है। भाजपा शासनकाल में औसतन 18 कॉलेज हर साल खुले। जबकि पिछले साल कांग्रेस के कार्यकाल में औसतन 10 कॉलेज ही खुल पाए। मेडिकल कॉलेज की बात करें तो 2003 में सिर्फ 2 थे जो 2018 तक 10 हो गई थी। वर्तमान में इनकी संख्या 15 है, लेकिन रायगढ़, कोरबा, महासमुंद में मेडिकल कॉलेज की प्रक्रियाधीन 2018 से चल रही थी। कांग्रेस ने पांच साल में सिर्फ कांकेर जिले में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना कर पायी। 

इसी तरह आयुर्वेद कॉलेज की बात करें तो 2003 में 1 थी जो 2018 में बढ़कर 4 हो गई। वर्तमान में इसकी संख्या 4 ही है। डेंटल कॉलेज की संख्या में 1 बढ़ोतरी जरुर हुई है। 2018 में 5 थी जो अब 6 हो गई है। कृषि और पशु चिकित्सा महाविद्यालय 2003 में 4 थी। 2018 तक इसकी संख्या 31 हो गई। अब 33 है। रमन सिंह के कार्यकाल में 31 कॉलेज खोले गए, भूपेश सरकार में 2 खाेले गए हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों की बात करें तो 2018 में 50 थी जो वर्तमान में घटकर 30 हो गई है। मतलब पिछले पांच सालों में 20 इंजीनियरिंग कॉलेजाें पर ताला लग गए। 

ऐसी ही स्थिति पॉलिटेक्निक कॉलेजों को लेकर है। भाजपा शासन के 15 सालों में 41 संस्थान खोले गए थे, जाे कांग्रेस शासनकाल में पिछले पांच सालों में 3 घटकर अब 48 रह गई है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भूपेश सरकार में 10 खोले गए, लेकिन लाइवलीहुड कॉलेज एक भी नहीं खुले, जो 2018 में 27 थी और अब भी 27 ही है। ट्रीपल आईटी, आईआईटी, आईएमएम एक भी नए नहीं खुले।