छत्तीसगढ़ में बिजली की खपत बढ़ी, पर पिछले पांच सालों में घट गया उत्पादन!

रायपुर। छत्तीसगढ़ बिजली के मामले में देश का पावर हब कहलाता है। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सैकड़ों की तादाद में छोटे बड़े बिजली घर हैं। सरप्लस राज्य होने के कारण अन्य प्रदेशों को बिजली सप्लाई भी करता है। प्रदेश में बिजली की खपत साल दर साल बढ़ रही है, पर आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्पादन पिछले पांच साल में घट गया है। बिजली उत्पादन घटने की वजह प्रदेश की सरकार द्वारा कोई नया संयंत्र नहीं लगा पाना है। 

बता दें कि राज्य स्थापना के समय उत्पादन क्षमता 1360 मेगावाट थी। जो इसमें 1240 मेगावाट ताप बिजली और 120 मेगावाट जल बिजली का योगदान था। 2008 तक बिजली उत्पादन बढ़कर 1923.23 मेगावट तक पहुंची। फिर 2015 की स्थिति में कुल बिजली उत्पादन क्षमता 2424.7 मेगावाट तक पहुंच गई। इसमें 2280 मेगावाट ताप बिजली और 138.7 मेगावाट जल बिजली शामिल है। 2018 तक प्रदेश में 3424.70 मेगावट बिजली उत्पादन हो रही थी जो वर्तमान में 500 यूनिट घटकर अब 2900 मेगावट रह गई है। बिजली उत्पादन घटने की वजह काेरबा की 240 मेगावट संयंत्र का बंद करना पड़ा। 

राज्य स्थापना के समय नवंबर 2000 में यहां बिजली की खपत प्रति व्यक्ति औसत तीन सौ यूनिट थी। 2008 में 400 तक पहुंची। 2018 में 1724 और 2023 में अब यह बढ़कर 2516 यूनिट तक पहुंच गई है। इसी तरह प्रदेश में बिजली की मांग 48 सौ मेगावाट के पार पहुंच जा रही है। 2000 में 18 लाख 91 हजार बिजली उपभोक्ता थे जो अब 62 लाख हो चुके हैं। मतलब प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही खपत भी बढ़ी है, पर बिजली की उत्पादन बढ़ने की बजाय घट रही है।

वर्ष 2001 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ का गठन हुआ। इस राज्य में कांग्रेस की सरकार आई। बतौर मुख्यमंत्री अजित जोगी ने तीन साल तक राज किया। इसके बाद 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता में आई, तब से लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सत्ता की बागडोर संभाली। इस दौरान प्रदेश के 95 प्रतिशत गांवों में न सिर्फ बिजली पहुंचाई गई, बल्कि बिजली उत्पादन को लेकर भी बेहतर काम हुए। नए-नए संयंत्र स्थापित किए गए। इसकी वजह से ही बिजली का उत्पादन 1360 मेगावाट यूनिट से 3424 मेगावाट यूनिट तक पहुंची थी, बल्कि बिजली उत्पादन में छत्तीसगढ़ नंबर वन बना था।

राज्य में एक सैकड़ों छोटे-बड़े बिजली घर हैं, यहां थर्मल और हाइड्राल दोनों ही सिस्टम से बिजली पैदा होती है। छत्तीसगढ़, देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां सरप्लस बिजली है। मतलब खपत से ज्यादा। हालांकि पिछले पांच छह सालों में स्थिति अब बदल गई है। खपत बढ़ने के साथ ही उत्पादन में कमी आयी है, बल्कि जीरो पॉवर कट स्टेट का तामगा भी छीन गया है और बिजली कटौती वाले देश के पांच राज्यों में छत्तीसगढ़ भी शामिल हो गया है। कभी