धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश में सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार किस तरह से फैला हुआ है. इसकी एक और बानगी देखने को मिली है. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र में बन रहा एक रिवर ओवरब्रिज गिर गया है. पुल का अभी 40 फीसदी ही काम हुआ था और अब यह धराशायी हो गया है. सोमवार को इस पुल की शटरिंग का काम दोबारा शुरू हुआ था, लेकिन इससे पहले काम शुरू होता, आधा-अधूरा पुल गिर गया. जानकारी के अनुसार, गांव जलाडी और खरट को जोड़ने के लिए यह पुल झलाड़ी में बन रहा था, जिसकी लागत तीन करोड़ रुपये है. लेकिन बनने से पहले ही यह ब्रिज ध्वस्त हो गया. इस घटना ने लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं. इस रिवर ब्रिज के बनने से दोनो गांवों में खुशी का माहौल बनने से पहले ही दहशत का माहौल बन गया है. सोमवार को गिरे इस रिवर ब्रिज के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये का बजट पास था और इस की लंबाई 104 मीटर निर्धारित थी. पुल का निर्माण करवाने के लिए संबंधित गांवों के लोग कई साल से कोशिश में लगे हुए थे. पूरे मामले पर लोक निर्माण विभाग ने चुप्पी साधी है. कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है.
वीरभद्र सरकार में हुआ था ठेका : इस पुल के निर्माण का टैंडर सात साल पहले वीरभद्र सरकार में हुआ था. तब से कछुआ चाल से इसका काम चल रहा था. इस पुल के बनने से 15 पंचायतों को फायदा होना था, लेकिन भ्रष्टाचार की नींव पर बन रहा यह पुल अंजाम से पहले ही मटियामेट हो गया.
हाल ही में हमीरपुर में भी गिरा था पुल : बीते माह मार्च के अंतिम सप्ताह में हमीरपुर जिले में भी एक निर्माणाधीन पुल गिर गया था. सीएम के जिले में नाबार्ड की योजना के तहत 2 करोड़ 97 लाख रुपये में कोट से जाहू वाया मुंडखर तुलसी के 1800 मीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है. इसी मार्ग पर सनेहल खड्ड के 75 मीटर लंबे पुल का निर्माण हो रहा है, जो कि ध्वस्त हो गया था.
